राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 83 of 115
कूकर ह्वै बन-बीथिन डोलौं, बचे सीथ रसिकन के खाऊँ।
'ललितकिसोरी' आस यही मम, ब्रज-रज तजि छिन अनत न जाऊँ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (65)
कुकर तैयार है, जो बचा है मैं बैठ कर खा सकती हूँ. 'ललित किशोरी' अस दिस मैया, ब्रज-रज तजि छिन अनात न जौं.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (65)