नन्द को लाल गोपाल माल उर

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 91 of 115

(राग दीपचंदी) नन्द को लाल गोपाल माल उर, भ्रमत रहत नवबाल के चायन। खंजन नैन बैन मन रंजन, अंजन नैन मैन सकुचायन॥ [1] ललित किशोरी हेरि इतै कित, जाहि उतै निज सहज सुभायन। कदम्ब की कुंज कुटीर कहुँ वह, ह्वै है पलोटत राधिका पायन॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (49) (राग दीपचंदी) नंद को लाल गोपाल मल उर, भ्रमित, नौबल का चयन। खंजन नैन बैन मन रंजन, अंजन नैन मैं सकुचयम्।।[1] ललित किशोरी हेरी इतै किट, जाहि उतै निज सहज सुभायम्। कदंब की कुंज कुटीर, वाह, हवादार, राधिका पायन.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, रिटेल पोस्ट (49)
नैनन राधे बैनन राधे सैनन राधे कृतानित राधेराधा नाम को आधार