राधा नाम सों चित रांच
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 97 of 115
(राग देस)
राधा नाम को आराध ।
साधन अन्य त्यागिके मनुवां याही को दृढ़ साध॥
मिलिहैं ललित किशोरी नागर शोभा सिंधु अगाध ।
फलि हैं सकल मनोरथ ह्वै है श्रीवनवास अवाध॥
- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०७)
(राग देसा) राधा नाम की आराधना। मनुवन याही का त्याग करने वाले के लिए साधन ही एकमात्र शक्तिशाली साधन है.. ललित किशोरी नगर शोभा सिंधु रसातल में पहुंच गई है. सम्पूर्ण चाह का फल क्या है, श्रीवनवास अवध क्या है.. - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (207)