राधा नाम सों चित रांच

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 98 of 115

(राग देस) राधा नाम को उर धार, मिलहिं रसिक मुकुटमणि मोहन आपहिं कुंजन द्वार, आठों जाम छकेंगी अँखियाँ छवि निकुंज विहार, ललित किशोरी फीके परिहैं सरवस सुख संसार॥ - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०४) (राग देसा) राधा का नाम हृदय में बसाओ, मिलहिं रसिक मुकुटमणि मोहन अपाहिन कुंजन द्वार, आठों नेत्रों में बिखरी छवि निकुंज विहार, ललित किशोरी जगत के सब सुख मिटें.. - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (204)
राधा नाम सों चित रांचराधा नाम पे मैं वारी