श्री राधेजू कौ श्रीवृंदावन वनराजु
Adivani — श्री रामराय
Verse 11 of 11
(राग भैरव)
श्री राधेजू कौ श्रीवृंदावन वनराजु।
रतन जटित भूमंडल शोभित, कनक वल्लरी साजु॥ [1]
अष्ट सिद्धि नवनिधि बुहारह, बीथिनु रोपि समाजु।
श्री रामराय प्यारे रखवारी, हिय हितु पोखन काजु॥ [2]
- श्री रामराय जी, आदिवाणी (3)
(राग भैरव) श्री राधेजू, श्री वृन्दावन वनराजू। रतन जाति भूमंडल शोभित, कनक वल्लरि साजु।।[1] अष्ट सिद्धि नवनिधि बुहारः, बिठिनु रोपि समाजु। श्री रामराय प्यारे रखवारी, हिय हितु पोखण काजू.. [2] - श्री रामराय जी, आदिवासी (3)