प्यारीजू प्यारेकौं भावै सो सहज करैं

Adivani — श्री रामराय

Verse 7 of 11

(राग श्री) प्यारीजू प्यारेकौं भावै सो सहज करैं, करैं सोई प्यारे जो भावै प्यारी कौं सदा। [1] तन सों तन मन सों मन प्रान सों प्रान विक्री कियौ, जीवत न बिना देखें कोऊ कबहुं एकदा॥ [2] प्यारी कौं पाय कें प्यारौ भयौ महाधनी, प्यारी हू प्यारे कों मानैं निज सम्पदा ! [3] जय जय श्रीरामराय श्री अनङ्गमञ्जरी के पाय, परि परि पाई जुगल रसिक प्रेम सम्प्रदा॥ [4] - श्री रामराय जी, आदिवाणी (1) (राग श्री) प्यारीजु प्यारेकौन भवै सो सहज करें, करिन सोई प्यारे जो भावै प्यारी कौन सदा। [1] बिका तन, पुत्र, तन, मन, पुत्र, मन, प्राण, पुत्र, प्राण, एक बार देखे बिना न रहूँ.. [2] प्रियतम को कौन पा सकता है, जो प्रिय है, धनी से डरता है, मैं वह प्रियतम हूँ, जो मेरी संपत्ति को अपना समझ सकता हूँ! [1]
प्यारी तोहि वुरी वान जह मान कीप्रथम सहचरी भाव हिय