नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 10 of 106
नारायण संसार में, भूपति भये अनेक।
मैं मेरी करते रहे, लै न गये तृण एक॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (17)
नारायण एक आदमी है, भूपति एक आदमी है. मैंने कराटे छोड़ दिया, लेकिन तीन नहीं छीने.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (17)