नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 11 of 106

चार दिनन की चांदनी, यह संपति संसार। नारायण हरि भजन करि, जासों होय उबार॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (29) चार दिन की चाँदनी, यह समृद्ध संसार। नारायण हरि भजन करि, जसोन होय ​​उबर.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (29)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै