नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 105 of 106
विद्या पढ़ करतौ फिरै, औरन को अपमान।
नारायण विद्या नहीं, ताहि अविद्या जान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (59)
तुम विद्या क्यों नहीं पढ़ते और दूसरों का अपमान क्यों नहीं करते? नारायण विद्या नहीं, ताहि अविद्या जन.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (59)