नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 20 of 106

निज स्वारथ के मित्र सब, यही जगत की चाल। नारायण बिन स्वारथी, हितू नंद को लाल॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (39) हर कोई स्वार्थ का भागीदार है, यही तो दुनिया की रीत है। नारायण बिन स्वरथी, हितु नन्द को लाल.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (39)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै