नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 22 of 106
धन विद्या गुण और बल, यह न बड़प्पन देत।
नारायण सोई बड़ो, जाको हरिसों हेत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (37)
धन, विद्या, गुण और बल, वह दुर्भाग्य नहीं देता। नारायण सोइ बड़ाओ, जाको हरिसन हेत.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (37)