नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 23 of 106

तात मात त्रिय भ्रात सुत, और सकल परिवार। नारायण अपनो वही, जाको हरिसों प्यार॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (40) तत् मत त्रय भारत सुता, और सकल परिवार। नारायण अपनो वही, जाको हरिसन प्यार.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (40)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै