नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 28 of 106

पुण्य पाठ पूजा, प्रगट, करत सहित हंकार। नारायण रीझै नहीं, चतुरन को सरदार॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (44) विनम्रता सहित सदाचार, पूजा, अभिव्यक्ति और कर्म का मार्ग। नारायण कोई सपेरा नहीं, चतुर नेता है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (44)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै