नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 29 of 106
दृग सों नाव निहार के, पुनि गज होय अरूढ़।
भोगन ते तरिबो चहै, नारायण मति मूढ़॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (47)
दृग पुत्र नव निहार के, पुनि गज होय अरुधा। मुझे भोग की विधि चाहिए, नारायण तो मूरख हैं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (47)