नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 30 of 106
चटक मटक नित छैल बन, तकत चलत चहुँ ओर।
नारायण यह सुधि नहीं, आज मरै कै भोर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (48)
आवाज रुक-रुक कर आ रही है, आवाज हर तरफ घूम रही है. नारायण, मुझे ये याद नहीं, आज मेरी मौत की सुबह है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (48)