नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 32 of 106
मन लाग्यो सुख भोग में, तरन चहै संसार।
‘नारायण’ कैसे बने, दिवस रैन को प्यार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (51)
मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई आदमी ख़ुशी का आनंद ले रहा हो, दुनिया में तैरना चाहता हो। 'नारायण' कैसे बनें, दिन और बारिश से प्यार करें.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (51)