नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 35 of 106
बहु विधि पूजा दान व्रत, करत गरब के साथ।
नारायण बिन दीनता, द्रवैं न दीनानाथ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (57)
बहुविधि पूजा, दान, व्रत और भेष। नारायण बिन दीनाता, द्रवण एन दीनानाथ.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (57)