नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 45 of 106

चन्द्रबदन मृग सम नयन, गति गयंद मृदुबोल। नारायण हरिभक्ति बिन, यह कौडी के मोल॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (71) चन्द्र मृग के समान नेत्र, चाल, गायन और मधुर वाणी। नारायण की भक्ति के बिना, इसका मूल्य दो कौड़ी है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (71)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै