नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 47 of 106

लखी न जिन छबि श्याम की, कियो न पलभर ध्यान। नारायण ते जगत में, प्रगट निपट पाषाण॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (73) काली छवि का एक क्षण भी ध्यान न करें। नारायण हैं जगत के नर, प्रकट पत्थर.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (73)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै