नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 65 of 106

नर संसारी लगन में, दुख सुख सहैं करोर। नारायण हरि प्रीति में, जो होवै सो थोर॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (135) वह सांसारिक कामनाओं से युक्त तथा सुख-दुःख को सहन करने वाला व्यक्ति है। नारायण हरि प्रीति पुरुष, जो भी है, बलवान है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (135)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै