नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 67 of 106

नारायण घाटी कठिन, जहां नेह को धाम। बिकल मूर्च्छा सिसकिबौ, यह मग में विश्राम॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (137) नारायण घाटी कठिन है, जहां नेह को धाम। बिकल मर्च सिसाकिबौ, या मग मी रेस्टिंग.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (137)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै