नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 68 of 106

नारायण अति कठिन है, हरि मिलिबे की बाट। या मारग तब पग धरै, प्रथम शीश दे काट॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (126) नारायण अति कठिन है, हरि मिलिबे की बात है। या जब मौत आगे बढ़ती है तो सबसे पहले सिर हिलाती है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (126)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै