नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 74 of 106
नारायण या प्रेम को, नद उमड़त जो ठौर।
पलमें लाज म्रजादके, तट काटत है दौर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (146)
नारायण या प्रेम को, वह स्थान जहाँ नदी बहती है। लम्हों में लज्जा है, लम्हे गए.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (146)