नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 73 of 106
नारायण जाके हिये, उपजत प्रेम प्रधान।
प्रथम हिया ही हरत है, लोकलाज कुलकान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (145)
प्रेम के प्रणेता नारायण चले गये। प्रथम हाय हाय हाय हाय हरत है, लोकलाज कुलकं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (145)