नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 76 of 106
नारायण जप योग तप, सबसों प्रेम प्रवीन।
प्रेम हरि कूँ करत है, प्रेमी के आधीन॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (149)
नारायण जप योग तप, सबासन प्रेम प्रवीण। हरि कुना प्रेम करता है, प्रेमी के वश में.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (149)