नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 77 of 106
नारायण यह प्रेम सुख, मुखसों कह्यो न जाय।
ज्यों गूंगौ गुड़ खात है, सैनन स्वाद लखाय॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (150)
नारायण, इस प्रेम को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जैसे गुंगौ गुड़ खाता है, सानन चखता है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (150)