नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 84 of 106
मन में लागि चटपटी, कब निरखूँ घनश्याम।
नारायण भूल्यो सभी, खान पान विश्राम॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (157)
मिर्ची मेरे दिल को दुखाती है, कब रोऊंगा घनश्याम। नारायण, सब कुछ भूल जाओ, शांति से आराम करो.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (157)