नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 86 of 106
लतन तरें ठाड़ो कबूं, कबहूँ यमुना तीर।
नारायण नैनन बसी, मूरति श्याम शरीर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (162)
लतान के गुण गाऊँ, यमुना को बाण कहूँ। नारायण नैनन बसि, मुराति श्याम शरीर.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (162)