नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 87 of 106

प्रेम सहित गदगद गिरा, कढ़त न मुखसों बात। नारायण महबूब बिन, और न कछु सुहात॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (163) वह प्यार में पागल है और कुछ नहीं कह पा रहा। नारायण प्रेमी के बिना, अच्छी बात नहीं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (163)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै