बंदे, अखतियार भला
Ashtadash Pada —
Verse 1 of 16
[राग आसावरी]
बंदे, अखतियार भला।
चित न डुलाव, आव समाधि-भीतर, न होहु अगला॥ [1]
न फ़िर दर-दर पिदर-दर, न होहु अँधला।
कहिं श्रीहरिदास करता किया सो हुआ, सुमेर अचल चला॥ [2]
- ललिता अवतार श्री हरिदास जी, अष्टादश पद (6)
[राग आसावरी] बंदे, अख्तियार भला। चित एन दुलव, एव समाधि-भितर, एन होहु अगला.. [1] एन फिर दारा-दार पिदार-दार, एन होहु अंधला। श्री हरिदास ने जो किया सो हुआ, सुमेर अचल रहा.. [2] - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, अष्टादश पाद (6)