किशोरी ! मेरी जीवन प्राण
Ashtayami Padavali — श्री हित कमलनैन
Verse 1 of 3
देखौ माई ! सुंदर कुंज बनी।
बैठे नवल नागरी नागर, छबि नहिं जात भनी॥ [1]
दादुर मोर पपीहा बोलत, बरसत घन सजनी।
जै श्री कमल नैंन हित अति सचु पायौ, जागे सब रजनी॥ [2]
- श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (20)
देखो माँ! सुंदर कुंज बानी. शहर के नौसैनिक अड्डे में बैठकर छवि दिखाई नहीं देती. [1] दादुर मोर पपीहा बोलुत, रैन घन सजनी। जय श्री कमल नैन हित अति सच्चु प्यौ, जागे सब रजनी.. [2] - श्री हित कमल नैन, श्री हित कमल नैन जी की वाणी, अष्टयामी पदावली (20)