किशोरी ! मेरी जीवन प्राण
Ashtayami Padavali — श्री हित कमलनैन
Verse 2 of 3
किशोरी ! मेरी जीवन प्राण।
बार-बार कहा कहि समझाऊँ, दूजी गति नहिं आन॥ [1]
जब देखौं तब उर-नैंननि सुख, बिनु देखैं अकुलान।
जैश्रीकमलनैंन हित हौं बस तेरैं, जानति हौ जिय जान॥ [2]
- श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (138)
किशोर! मेरा जीवन और आत्मा. बार-बार कहा, हम समझ लें, दूसरी कोई गति नहीं.. [1] जब देखते हैं तो सुख होता है, बिना देखे भ्रम होता है। जय श्री हित कमलनैन हित, मैं तुम्हारा ही हूं, ये जानता हूं जय जान.. [2] - श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टयामी पदावली (138)