वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 101 of 268

श्रीपति श्रीमुख कमल कह्मौ, नारद सौं समुझाई। वन्दावन रस सबनि तें, राख्यौ दूरि दुराइ॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (42) श्रीपति श्रीमुख कमल कहो, नारद मेरी बात सुनो। वंदावन रस सबनि तेन, राख्यौ दुरि दुराई.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (42)
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