वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 102 of 268

अंस कला औतार जे, ते सेवक हैं ताहि। ऐसे वृंदा विपिन कौं, मन वच कै अवगाहि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (43) उत्तर: मैं काला अवतार हूँ, मैं आपका सेवक हूँ। कौन है ऐसी वृंदा विपिन, जो मन की सुनती है.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (43)
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