वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 121 of 268

रीति भजन की यहै ध्रुव, छाँडो सब की आस। जुगल चरन की शरन गहि, मनमें धरि विश्वास॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत लीला (52) यह अनुष्ठान स्तोत्र का ध्रुव है, छंद सबकी आशा है। जुगल चरणों की शरण ली, मन में रखा विश्वास.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन षट लीला (52)
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