वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 123 of 268
वृन्दावन में जो कबहूँ, भजन कछू नहिं होय।
रज तो उड़ि लागै तनहिं, पीवै जमुना तोय॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (53)
मैं जब भी वृन्दावन में गाता हूँ तो कोई भजन नहीं गाया जाता। राज तो उरी लागै तन्ही, पिवै जमुना तोई.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (53)