वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 125 of 268
और ठौर जो जतन करै, होत भजन तऊ नाहिं।
ह्यां फिरै स्वारथ आपने, भजन गहे फिरै बाँहि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (55)
और चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें, यह काम नहीं करता। मैं हृदय की ओर मुड़ रहा हूं, मैं भजन गा रहा हूं, मैं कहीं नहीं जा रहा हूं.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (55)