वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 126 of 268

और देस के बसत ही, घटत भजन की बात। वृन्दावन में स्वारथौ, उलटि भजन ह्वै जात॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (56) और हम बात कर रहे हैं राष्ट्रगान की ही. वृन्दावन में स्वार्थ है, उल्टा भजन है.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (56)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिआज सखि निरख रूप भरि नैन