आज सखि निरख रूप भरि नैन

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 127 of 268

(राग विहागरौ) छबीली छबि सौं रँगीले दोउ, राजत जमुना-तीर। अंग-अंग भूषण प्रतिबिंबित, स्यामल-गौर सरीर॥ [1] गावत मोर, मराल, भॅवर, पिक, संग सखिनु की भीर। 'हित ध्रुव' रूप माधुरी निरखत, ह्वै गये सबै अधीर॥ [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (57) (राग विहगरौ) छबीली छबि सौं रंगीले दोउ, रजत जमुना-तीर। शरीर के हर अंग पर आभूषण दिखाई देते हैं, शरीर काला और सफेद है। [1] इनमें मोर, मराल, ऊदबिलाव, पिका, सखिनु पक्षी शामिल हैं। 'हित ध्रुव' के रूप में माधुरी, सब हुए अधीर.. [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (57)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि