वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 129 of 268

यघपि सब औगुन भर्यौ, तदपि करत तुव ईठ। हितमय वृन्दाविपिन कौं, कैसे दीजै पीठ॥ - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (57) भले ही सारे बोझ भारी हों, फिर भी आप ऐसा करते हैं। दाता वृंदाविपिन कौन है, वह कैसे अपना साथ दे सकते हैं.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (57)
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