वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 130 of 268

वृंदावन तें अनत ही, जेतिक द्यौस बिहात। ते दिन लेखे जिनि गनौ, वृथा अकारथ जात॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (58) वृन्दावन दास अनत हि, जेतिक दयोस बिहट। ते दिन लेखे जिनि गणौ, वृथा अकारथ जात.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (58)
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