वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 191 of 268
जिनकौ वृन्दाविपिन है, कृपा तिनहिं की होइ।
वृंदावन में तबहि तौ, रहन पाई है सोइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (102)
जो वृन्दाविपिन हैं उनका कल्याण हो। वृन्दावन में विनाश है, जीते जी सो रहे हो.. - श्री ध्रुवदास, ब्यालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (102)