वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 192 of 268
वृन्दावन सत रतन की, माला गुही बनाइ।
भाग भाग जाके लिखी, सोई पहिरै आइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (103)
वृन्दावन सत रतन माला गुहा बनाया। दौड़ो और लिखो, पहन कर सो जाऊंगा.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (103)