कुँवरि-कुँवर दोउ रसिक वर, सब सखियनि के प्रान।
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 208 of 268
कुँवरि-कुँवर दोउ रसिक वर, सब सखियनि के प्रान।
दंपति सुख सुख जिनहिं के, नाहिंन गति कछु आन॥
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, ब्रज लीला (188)
कुंवारी-कुंवर, दो रोमांटिक दूल्हे, सभी प्रेमियों की जान। धनपति, सुख, सुख, सुख, कुछ नहीं, कुछ नहीं.. - श्री ध्रुवदास, ब्यालिस लीला, ब्रज लीला (188)