वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 212 of 268
कुंज ते निकसि दोऊ ठाढ़े जमुना के तीर ,
आजु सखी औरै भाँति प्रिया रंग भरी हैं। [1]
निसि के चिन्हनि चितै मुसकात रस - निधि,
वहु विधि सुख - केलि रंग - रस ढरी हैं॥ [2]
देखैं 'ध्रुव' छबि सींवा मृदु भुज मेलैं ग्रीवा,
हंसी, भौंरी, मोरी, मृगी ठौर ते न टरी हैं। [3]
हरी - हरी लाल - लाल पीत - सेत सारी तन ,
पहिरैं सहेली सबै चित्र की सी खरी हैं॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रृंगार शत 1 (49)
बगीचे में बहती हुई यमुना के तीर मेरी सखियों और अन्य प्यारे रंगों की तरह भारी हैं। [1]. [3] हरि - हरि लाल - लाल पीला - सेट साडी बदन, चित्र बन खड़े सब सखा.. [4] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत 1 (49)