गरजनि घन अरु दामिनी

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 233 of 268

(राग मलार) ललित लतानि तरैं नान्हीं-नान्हीं बूँदै परैं, भींजत रँगीले दोऊ प्रीतम प्यारी॥ [1] हँसि-हँसि बातैं करैं भुज-मूल अंस धरैं, लाग्यौ पीत-पट तन सुरँग कसूँभी सारी॥ [2] विवि वदननि छवि रही कछु फुँहीं फबि, उपमा न जात कछू मन में विचारी॥ [3] रसिक उभय उदार गावत राग मलार, 'हित ध्रुव' सुनि तान देत प्रान वारी॥ [4] - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, पद्यावली (73) (राग मलारा) ललित लतानि तरैं नन्हीं-नन्ही बुंदई परैं, भींजत रंगीले दू प्रीतम प्यारी। [3] रसिक उभय उधार गावत राग मलार, 'हित ध्रुव' सुनि तन देत प्राण वारी.. [4] - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, पद्यावली (73)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिआज सखि निरख रूप भरि नैन