वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 242 of 268

पट तर बृन्दाविपिन की, कहिं धौं दीजै काहि। जेहि बन की ध्रुव रेनु में, मरिबौउ मंगल आहि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (71) बृंदाविपिन के पंखों की पीठ, कहीं फूंक मारने को। जेहि बन कि ध्रुव रेनु पुरुष, मारिबौ मंगल अहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (71)
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