वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 241 of 268

परनिंदा के किये तें, आवत नहिं कछु हाथ। मूरख परवत पाप कौ, लै चल्यौ अपने साथ॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (20) मैंने दस बार निंदा करने की कोशिश की, लेकिन कछुआ वापस नहीं आया। पाप का मूर्ख पर्वत कौन है, क्या तुम इसे अपने साथ ले जाओगे.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मानस शिक्षा (20)
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