वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 246 of 268
(कवित्त)
प्यारे जू की जीवनि है नवल किशोरी गोरी,
तैसी भाँति प्यारी जू के जीवन बिहारी है। [1]
जोई जोई भावै उन्है सोई सोई रुचै उन्हें,
एकै गति भई ऐसी रचकौ न न्यारी है॥ [2]
छिनु छिनु देखि देखि छवि की तरंग नाना,
प्रीतम दुहँन सुधि देह की विसारी है। [3]
हित ध्रुव रीझि रीझि रहे रस भीजि प्रीति,
ऐसी अब लागी कबहु सुनी न निहारी है॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रृंगार शत 2 (4)
(कविता) प्यारे जू की जीवनी है नवल किशोरी गोरी, इतनी प्यारी जू की जान है बिहारी। [1] जोई जोई भावै उन्हाई सोई सोई रुचै ऊंचे, एक गति भई ऐसी रचकौ न न्यारी है.. [2] छिनु छिनु देखी देखी, छवि तरंग नाना, प्यारी दूधिया स्मृति तन का विस्तार है। [3].