वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 248 of 268

रे मन रसिकनि-संग बिनु, रंच न उपजै प्रेम। या रस कौ साधन यहै, और करौ जिनि नेम॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (29) रे मन रसिकानि-संग बिनु, रंच न उपजै प्रेम। या यहाँ सुख का स्रोत क्या है, और जिनि के नाम पर मैं क्या करूँ.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन शत (29)
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